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mahabharat 10.9.19-20: निर्दोष राजासिंह! आप समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ माने जाते थे। गदायुद्ध में आप कोषाध्यक्ष कुबेर के समान थे और स्वयं संकर्षण के शिष्य थे, फिर भी भीमसेन को आप पर आक्रमण करने का अवसर कैसे मिला? हे नरसिंह! आप तो सदैव बलवान और गदायुद्ध में निपुण रहे हैं। फिर उस पापात्मा ने आपको कैसे मारा?॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 10.9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  10.9.19-20 
आहुस्त्वां राजशार्दूल मुख्यं सर्वधनुष्मताम्।
धनाध्यक्षोपमं युद्धे शिष्यं संकर्षणस्य च॥ १९॥
कथं विवरमद्राक्षीद् भीमसेनस्तवानघ।
बलिनं कृतिनं नित्यं स च पापात्मवान् नृप॥ २०॥
 
 
अनुवाद
निर्दोष राजासिंह! आप समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ माने जाते थे। गदायुद्ध में आप कोषाध्यक्ष कुबेर के समान थे और स्वयं संकर्षण के शिष्य थे, फिर भी भीमसेन को आप पर आक्रमण करने का अवसर कैसे मिला? हे नरसिंह! आप तो सदैव बलवान और गदायुद्ध में निपुण रहे हैं। फिर उस पापात्मा ने आपको कैसे मारा?॥19-20॥
 
‘Innocent King Singh! You were considered the best among all archers. You were equal to the treasurer Kubera in mace fighting and were a disciple of Sankarshan himself, yet how did Bhimsena get the opportunity to attack you? Lord of men! You have always been strong and an expert in mace fighting. Then how did that sinful soul kill you?॥19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)