vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध
»
श्लोक 9-10h
श्लोक
10.8.9-10h
इत्युक्त्वा प्राविशद् द्रौणि: पार्थानां शिबिरं महत्॥ ९॥
अद्वारेणाभ्यवस्कन्द्य विहाय भयमात्मन:।
अनुवाद
ऐसा कहकर द्रोणपुत्र द्वार खोले बिना ही पाण्डवों की विशाल छावनी में कूद पड़ा। उसने अपने प्राणों का सारा भय त्याग दिया था॥9 1/2॥
Saying this, Drona's son jumped into the Pandava's huge camp without opening the door. He had given up all fear for his life.॥9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×