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mahabharat 10.7.68: स्वयं महादेवजी के समान अनेक अदृश्य भूत-प्रेत भी शत्रु शिविर की ओर जाते हुए अश्वत्थामा के साथ दौड़े ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  10.7.68 
तमदृश्यानि भूतानि रक्षांसि च समाद्रवन्।
अभित: शत्रुशिबिरं यान्तं साक्षादिवेश्वरम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
स्वयं महादेवजी के समान अनेक अदृश्य भूत-प्रेत भी शत्रु शिविर की ओर जाते हुए अश्वत्थामा के साथ दौड़े ॥68॥
 
Like Mahadevji himself, many invisible ghosts and demons also ran along with Ashwatthama while going towards the enemy camp. 68॥
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि द्रौणिकृतशिवार्चने सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वमें द्रोणपुत्रद्वारा की हुई भगवान् शिवकी पूजाविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)