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mahabharat 10.7.54: तब अत्यंत क्रोधी और पराक्रमी द्रोणपुत्र ने सोमदेवता से संबंधित मंत्र का जाप करके अपना शरीर दान में दे दिया ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  10.7.54 
तत: सौम्येन मन्त्रेण द्रोणपुत्र: प्रतापवान्।
उपहारं महामन्युरथात्मानमुपाहरत्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
तब अत्यंत क्रोधी और पराक्रमी द्रोणपुत्र ने सोमदेवता से संबंधित मंत्र का जाप करके अपना शरीर दान में दे दिया ॥54॥
 
Then the very wrathful and mighty son of Drona, by chanting the mantra associated with the god Soma, offered his own body as a gift. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)