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mahabharat 10.7.36: उनके वस्त्र विविध रंगों से रंगे हुए थे। वे विचित्र मालाओं और चंदन से सुसज्जित थीं। उन्होंने रत्नजड़ित विचित्र नूपुर पहने हुए थे और उनके सभी हाथ ऊपर की ओर उठे हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  10.7.36 
नानाविरागवसनाश्चित्रमाल्यानुलेपना:।
रत्नचित्राङ्गदधरा: समुद्यतकरास्तथा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
उनके वस्त्र विविध रंगों से रंगे हुए थे। वे विचित्र मालाओं और चंदन से सुसज्जित थीं। उन्होंने रत्नजड़ित विचित्र नूपुर पहने हुए थे और उनके सभी हाथ ऊपर की ओर उठे हुए थे।
 
Their clothes were dyed in various colours. They were adorned with strange garlands and sandalwood. They wore strange anklets made of gems and all of their hands were raised upwards.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)