श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.7.31 
महासर्पाङ्गदधराश्चित्राभरणधारिण:।
रजोध्वस्ता: पङ्कदिग्धा: सर्वे शुक्लाम्बरस्रज:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कुछ ने बाजूबंद की जगह बड़े-बड़े साँप पहने थे। कई अजीबोगरीब आभूषणों से सुसज्जित थे, कईयों के शरीर धूल से सने थे। कईयों के शरीर पर कीचड़ लिपटा हुआ था। सभी ने सफ़ेद वस्त्र और सफ़ेद फूलों की मालाएँ पहन रखी थीं।
 
Some wore large snakes instead of armlets. Many were adorned with strange ornaments, many had their bodies covered with dust. Many had mud wrapped around their bodies. All of them were wearing white clothes and garlands of white flowers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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