श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.7.25 
जटाधरा: पञ्चशिखास्तथा मुण्डा: कृशोदरा:।
चतुर्दंष्ट्राश्चतुर्जिह्वा: शङ्कुकर्णा: किरीटिन:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
किसी के सिर पर जटाएँ थीं, किसी के पाँच गुच्छे थे और बहुत से लोग सिर मुँड़ाए हुए थे। बहुत से लोगों के पेट बहुत पतले थे, किसी के चार दाढ़ और चार जीभें थीं। किसी के कान खूँटियों के समान थे और बहुत से पार्षद अपने सिर पर मुकुट धारण किए हुए थे॥ 25॥
 
Some wore matted locks on their entire head, some had five tufts of hair and many kept their heads shaven. Many had very thin bellies, some had four molars and four tongues. Some had ears that looked like pegs and many councillors wore crowns on their heads.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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