श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.6.9 
तथा तेजोमरीचिभ्य: शङ्खचक्रगदाधरा:।
प्रादुरासन् हृषीकेशा: शतशोऽथ सहस्रश:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसके तेज से शंख, चक्र और गदा धारण किये हुए सैकड़ों-हजारों विष्णु प्रकट हो रहे थे।
 
From the rays of its brilliance, hundreds and thousands of Vishnus holding conch, discus and mace were appearing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)