Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.5.6: परंतु जो सत्यमार्ग पर नहीं चल सकता, जो दूसरों की अवहेलना करता है और जिसका अंतःकरण अशुद्ध है, वह पापी मनुष्य लोगों द्वारा बताए गए शुभ मार्ग को त्यागकर अनेक पापकर्म करने लगता है ॥6॥ | mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनेयस्त्ववमानी यो दुरात्मा पापपूरुष:।
दिष्टमुत्सृज्य कल्याणं करोति बहुपापकम्॥ ६॥
अनुवाद
परंतु जो सत्यमार्ग पर नहीं चल सकता, जो दूसरों की अवहेलना करता है और जिसका अंतःकरण अशुद्ध है, वह पापी मनुष्य लोगों द्वारा बताए गए शुभ मार्ग को त्यागकर अनेक पापकर्म करने लगता है ॥6॥
But he who cannot be led on the right path, who is disregarding others and whose conscience is impure, this sinful person abandons the auspicious path shown by the people and starts committing many sinful acts. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥