कथं च निहत: पाप: पाञ्चाल्य: पशुवन्मया।
शस्त्रेण विजिताँल्लोकान् नाप्नुयादिति मे मति:॥ ३६॥
अनुवाद
मैं यह निश्चय कर चुका हूँ कि मेरे हाथों पशु के समान मारा गया पापी पांचालराज धृष्टद्युम्न किसी भी प्रकार शस्त्रों द्वारा प्राप्त होने वाले पुण्यलोकों को प्राप्त नहीं करेगा।’ ॥36॥
I am determined that the sinful Prince of Panchala, Dhrishtadyumna, who was killed like an animal by my hands, will not in any way attain the virtuous worlds which are attained by weapons.' ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥