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mahabharat 10.5.35: अतः मैं उसी पापकर्मसे उस धर्मत्यागी पांचालराजकुमारको मार डालूँगा॥35॥   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.5.35 
तं तथैव हनिष्यामि न्यस्तधर्माणमद्य वै।
पुत्रं पाञ्चालराजस्य पापं पापेन कर्मणा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं उसी पापकर्मसे उस धर्मत्यागी पांचालराजकुमारको मार डालूँगा॥35॥
 
‘Therefore I will kill that sinful Prince of Panchala, who has abandoned Dharma, by the same sinful act.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)