Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.5.33: उस समय अश्वत्थामा अपने पिता की हत्या को याद करके क्रोध से आग बबूला हो रहा था। उसने उन्हें बताया कि वह क्या करना चाहता है।   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.5.33 
अश्वत्थामा तु संक्रुद्ध: पितुर्वधमनुस्मरन्।
ताभ्यां तथ्यं तथाऽऽचख्यौ यदस्यात्मचिकीर्षितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उस समय अश्वत्थामा अपने पिता की हत्या को याद करके क्रोध से आग बबूला हो रहा था। उसने उन्हें बताया कि वह क्या करना चाहता है।
 
At that time Ashvatthama was fuming with anger remembering the murder of his father. He told them exactly what he wanted to do.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)