श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.5.31 
तमब्रूतां महात्मानौ भोजशारद्वतावुभौ।
किमर्थं स्यन्दनो युक्त: किञ्च कार्यं चिकीर्षितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस समय भोजवंशी कृतवर्मा और शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य, दोनों महामनस्वी योद्धाओं ने उससे कहा - 'अश्वत्थामा! तुमने रथ क्यों जोता है? इस समय तुम कौन-सा कार्य करना चाहते हो?॥31॥
 
At that time, Kritavarma of the Bhoja dynasty and Kripacharya, son of Sharadwan, both great-minded warriors, said to him - 'Ashwatthaman! Why have you harnessed the chariot? What work do you want to do at this time?॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)