श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.5.30 
संजय उवाच
एवमुक्त्वा महाराज द्रोणपुत्र: प्रतापवान्।
एकान्ते योजयित्वाश्वान् प्रायादभिमुख: परान्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: 'महाराज! ऐसा कहकर वीर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने एकान्त में अपने घोड़े जोते और शत्रुओं की ओर चल पड़े।
 
Sanjaya says: 'Maharaj! Having said this, the valiant son of Drona, Ashwatthama, harnessed his horses in solitude and proceeded towards the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)