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mahabharat 10.5.13-14: हे प्रभु! आज रात को समस्त पांचाल कवच उतारकर निश्चिन्त होकर शवों के समान सो रहे होंगे। उस अवस्था में जो भी क्रूर मनुष्य उनके साथ विश्वासघात करेगा, वह नाव के बिना ही नरक के विशाल एवं गहरे समुद्र में डूब जाएगा॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  10.5.13-14 
अद्य स्वप्स्यन्ति पञ्चाला विमुक्तकवचा विभो।
विश्वस्ता रजनीं सर्वे प्रेता इव विचेतस:॥ १३॥
यस्तेषां तदवस्थानां द्रुह्येत पुरुषोऽनृजु:।
व्यक्तं स नरके मज्जेदगाधे विपुलेऽप्लवे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आज रात को समस्त पांचाल कवच उतारकर निश्चिन्त होकर शवों के समान सो रहे होंगे। उस अवस्था में जो भी क्रूर मनुष्य उनके साथ विश्वासघात करेगा, वह नाव के बिना ही नरक के विशाल एवं गहरे समुद्र में डूब जाएगा॥13-14॥
 
O Lord! Tonight all the Panchalas will be sleeping like dead bodies, having taken off their armor and without any worry. In that condition, any cruel person who betrays them will surely drown in the vast and deep sea of ​​hell without a boat.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)