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mahabharat 10.5.11-12: इस संसार में जो सोये हुए हैं, जिन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र रख दिए हैं, जिन्होंने अपने रथ और घोड़े खोल दिए हैं, जो 'मैं आपका हूँ' कह रहे हैं, जो शरण में आए हैं, जिनके बाल खुले हुए हैं और जिनके वाहन नष्ट हो गए हैं, उनको मारना धार्मिक दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता है। ॥11-12॥   |   mahabharat अध्याय 10.5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 5: अश्वत्थामा और कृपाचार्यका संवाद तथा तीनोंका पाण्डवोंके शिविरकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  10.5.11-12 
न वध: पूज्यते लोके सुप्तानामिह धर्मत:।
तथैवापास्तशस्त्राणां विमुक्तरथवाजिनाम्॥ ११॥
ये च ब्रूयुस्तवास्मीति ये च स्यु: शरणागता:।
विमुक्तमूर्धजा ये च ये चापि हतवाहना:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जो सोये हुए हैं, जिन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र रख दिए हैं, जिन्होंने अपने रथ और घोड़े खोल दिए हैं, जो 'मैं आपका हूँ' कह रहे हैं, जो शरण में आए हैं, जिनके बाल खुले हुए हैं और जिनके वाहन नष्ट हो गए हैं, उनको मारना धार्मिक दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता है। ॥11-12॥
 
In this world it is not considered good from the religious point of view to kill those who are asleep, who have put away their arms and weapons, who have untied their chariots and horses, who are saying "I am yours", who have taken refuge, whose hair are loose and whose vehicles have been destroyed. ॥11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)