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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 4: कृपाचार्यका कल प्रात:काल युद्ध करनेकी सलाह देना और अश्वत्थामाका इसी रात्रिमें सोते हुओंको मारनेका आग्रह प्रकट करना
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श्लोक 2
श्लोक
10.4.2
अनुयास्यावहे त्वां तु प्रभाते सहितावुभौ।
अद्य रात्रौ विश्रमस्व विमुक्तकवचध्वज:॥ २॥
अनुवाद
आज रात को कवच और ध्वजा उतारकर विश्राम करो। कल प्रातःकाल हम दोनों साथ-साथ तुम्हारे पीछे चलेंगे॥ 2॥
Take off your armor and flag tonight and rest. Tomorrow morning we both will follow you together.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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