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श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  10.2.32-33h 
ते वयं धृतराष्ट्रं च गान्धारीं च समेत्य ह॥ ३२॥
उपपृच्छामहे गत्वा विदुरं च महामतिम्।
 
 
अनुवाद
अतः आओ, हम राजा धृतराष्ट्र, देवी गांधारी और परम बुद्धिमान विदुरजी के पास जाकर उनसे प्रश्न करें।
 
Therefore, let us go to King Dhritarashtra, Goddess Gandhari and the extremely intelligent Vidurji and ask them. 32 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)