श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  10.2.31-32h 
ततोऽस्य मूलं कार्याणां बुद्धॺा निश्चित्य वै बुधा:॥ ३१॥
तेऽत्र पृष्टा यथा ब्रूयुस्तत् कर्तव्यं तथा भवेत्।
 
 
अनुवाद
पूछने पर विद्वान हितैषी को चाहिए कि वह अपनी बुद्धि से अपने कर्मों का मूल कारण निश्चित करके जो भी उपदेश दे, उसका पालन करे। ॥31 1/2॥
 
When asked, the learned well-wisher should follow whatever advice he gives after determining the root cause of his actions with his intellect. ॥ 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)