Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.2.25-27h: दुर्योधन लोभी और अदूरदर्शी था। अपनी मूर्खता के कारण उसने न तो किसी का सहयोग लिया और न ही अधिक विचार किया। उसने अपना कल्याण चाहने वालों का अनादर किया और दुष्टों से परामर्श लिया तथा सबके विरोध के बावजूद भी वह अधिक प्रतिभाशाली पांडवों के प्रति शत्रुतापूर्ण हो गया। | mahabharat अध्याय 10.2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्योधन लोभी और अदूरदर्शी था। अपनी मूर्खता के कारण उसने न तो किसी का सहयोग लिया और न ही अधिक विचार किया। उसने अपना कल्याण चाहने वालों का अनादर किया और दुष्टों से परामर्श लिया तथा सबके विरोध के बावजूद भी वह अधिक प्रतिभाशाली पांडवों के प्रति शत्रुतापूर्ण हो गया।
Duryodhan was greedy and short-sighted. Due to his foolishness, he neither took support from anyone nor did he think much. He disrespected the people who wanted his welfare and took advice from the wicked and despite everyone's objection, he became hostile towards the more talented Pandavas. 25-26 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥