श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 2: कृपाचार्यका अश्वत्थामाको दैवकी प्रबलता बताते हुए कर्तव्यके विषयमें सत्पुरुषोंसे सलाह लेनेकी प्रेरणा देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.2.12 
तत्रालसा मनुष्याणां ये भवन्त्यमनस्विन:।
उत्थानं ते विगर्हन्ति प्राज्ञानां तन्न रोचते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मनुष्यों में जो आलसी हैं और मन पर नियंत्रण नहीं रखते, वे पुरुषार्थ की निन्दा करते हैं, परन्तु विद्वानों को यह अच्छा नहीं लगता॥12॥
 
Among men, those who are lazy and lack control over their minds criticise the efforts made. But the learned do not like this.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)