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mahabharat 10.18.2: इसके बाद उन्होंने यज्ञ के साधन, यज्ञ, यज्ञ के लिए उत्तरदायी देवताओं तथा यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले पदार्थों की कल्पना की।   |   mahabharat अध्याय 10.18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  10.18.2 
कल्पयामासुरथ ते साधनानि हवींषि च।
भागार्हा देवताश्चैव यज्ञियं द्रव्यमेव च॥ २॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने यज्ञ के साधन, यज्ञ, यज्ञ के लिए उत्तरदायी देवताओं तथा यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले पदार्थों की कल्पना की।
 
After that he imagined the means of yagya, the sacrifices, the deities responsible for the yagya and the substances used for the yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)