Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.18.19: तत्पश्चात् देवताओं की प्रेरणा से वाणी ने महादेव के धनुष की डोरी काट दी। हे राजन! डोरी कटते ही धनुष अचानक उछलकर नीचे गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 10.18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 18: महादेवजीके कोपसे देवता, यज्ञ और जगत‍्की दुरवस्था तथा उनके प्रसादसे सबका स्वस्थ होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.18.19 
ततो वागमरैरुक्ता ज्यां तस्य धनुषोऽच्छिनत्।
अथ तत् सहसा राजंश्छिन्नज्यं व्यस्फुरद् धनु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं की प्रेरणा से वाणी ने महादेव के धनुष की डोरी काट दी। हे राजन! डोरी कटते ही धनुष अचानक उछलकर नीचे गिर पड़ा।
 
Thereafter, inspired by the gods, Vaani cut the string of Mahadev's bow. O King! Suddenly, when the string was cut, the bow jumped and fell down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)