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श्लोक 10.17.4  |
यस्य द्रोणो महेष्वासो न प्रादादाहवे मुखम्।
निजघ्ने रथिनां श्रे ष् ठं धृष्टद्युम्नं कथं नु स:॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| जिनके सामने महान धनुर्धर द्रोणाचार्य युद्ध में अपना मुख भी नहीं दिखाते थे, उन महारथियों में श्रेष्ठ धृष्टद्युम्न को अश्वत्थामा ने कैसे मार डाला?॥4॥ |
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| 'How did Ashwatthama kill Dhrishtadyumna, the best of charioteers, before whom the great archer Dronacharya would not show his face in the war?॥ 4॥ |
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