श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 17: अपने समस्त पुत्रों और सैनिकोंके मारे जानेके विषयमें युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे पूछना और उत्तरमें श्रीकृष्णके द्वारा महादेवजीकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.17.4 
यस्य द्रोणो महेष्वासो न प्रादादाहवे मुखम्।
निजघ्ने रथिनां श्रे ष् ठं धृष्टद्युम्नं कथं नु स:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जिनके सामने महान धनुर्धर द्रोणाचार्य युद्ध में अपना मुख भी नहीं दिखाते थे, उन महारथियों में श्रेष्ठ धृष्टद्युम्न को अश्वत्थामा ने कैसे मार डाला?॥4॥
 
'How did Ashwatthama kill Dhrishtadyumna, the best of charioteers, before whom the great archer Dronacharya would not show his face in the war?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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