श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 17: अपने समस्त पुत्रों और सैनिकोंके मारे जानेके विषयमें युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे पूछना और उत्तरमें श्रीकृष्णके द्वारा महादेवजीकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.17.16 
ता: सृष्टमात्रा: क्षुधिता: प्रजा: सर्वा: प्रजापतिम्।
बिभक्षयिषवो राजन् सहसा प्राद्रवंस्तदा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सृष्टि की रचना होते ही भूख से पीड़ित सारी प्रजाएँ सहसा प्रजापति को खा जाने की इच्छा से उनकी ओर दौड़ीं॥16॥
 
King! As soon as the creation of the universe took place, all the people suffering from hunger suddenly ran towards Prajapati with the desire to devour him. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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