श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 17: अपने समस्त पुत्रों और सैनिकोंके मारे जानेके विषयमें युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे पूछना और उत्तरमें श्रीकृष्णके द्वारा महादेवजीकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.17.14 
तमब्रवीत् पिता नास्ति त्वदन्य: पुरुषोऽग्रज:।
स्थाणुरेष जले मग्नो विस्रब्ध: कुरु वैकृतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर पितामह ब्रह्मा ने सृष्टिकर्ता से कहा - 'आपके अतिरिक्त यहाँ कोई भी बड़ा पुरुष नहीं है। यदि यह स्थाणु (शिव) भी हैं, तो वे जल में डूबे हुए हैं; अतः आप निश्चिंत होकर सृष्टि का कार्य आरम्भ करें।'॥14॥
 
Hearing this, the father Brahma said to the creator - 'There is no elder person other than you. Even if this Sthānu (Shiva) is there, he is submerged in water; therefore you should start the work of creation without any worry.'॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd