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श्लोक 10.16.37  |
उत्तस्थौ पुत्रशोकार्ता तत: कृष्णा मनस्विनी।
कृष्णं चापि महाबाहु: परिपप्रच्छ धर्मराट्॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| तब पुत्रशोक से पीड़ित मनस्विनी कृष्णा ने अपना व्रत त्याग दिया और महाबली धर्मराज ने भगवान श्रीकृष्ण से एक बात पूछी॥37॥ |
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| Then Manaswini Krishna, suffering from the grief of her son, left her fast and the mighty Dharamraj asked Lord Krishna one thing. 37॥ |
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इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि ऐषीकपर्वणि द्रौपदीसान्त्वनायां षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वके अन्तर्गत ऐषीकपर्वमें द्रौपदीकी सान्त्वनाविषयक सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥
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