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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना
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श्लोक 35
श्लोक
10.16.35
तं गृहीत्वा ततो राजा शिरस्येवाकरोत् तदा।
गुरोरुच्छिष्टमित्येव द्रौपद्या वचनादपि॥ ३५॥
अनुवाद
तब राजा युधिष्ठिर ने द्रौपदी के कहने पर उस मणि को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। उन्होंने उस मणि को अपने गुरु का प्रसाद माना।
Then King Yudhishthira took that gem and wore it on his head as per Draupadi's advice. He considered that gem as a prasad from his Guru.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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