श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.16.27 
अयं भद्रे तव मणि: पुत्रहन्तुर्जित: स ते।
उत्तिष्ठ शोकमुत्सृज्य क्षात्रधर्ममनुस्मर॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! यह आपके पुत्रों को मारने वाले अश्वत्थामा की मणि है। हमने आपके उस शत्रु को परास्त कर दिया है। अब शोक त्यागकर उठो और क्षत्रियधर्म का स्मरण करो॥ 27॥
 
'Bhadre! This is the gem of Ashwatthama who killed your sons. We have defeated that enemy of yours. Now leave the mourning and get up and remember the Kshatriyadharma.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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