श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.16.25 
तामुपेत्य निरानन्दां दु:खशोकसमन्विताम्।
परिवार्य व्यतिष्ठन्त पाण्डवा: सहकेशवा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
शोक और शोक में डूबी हुई तथा हर्ष से रहित द्रौपदी के पास पहुँचकर श्रीकृष्ण सहित पाण्डव उसे चारों ओर से घेरकर बैठ गए॥25॥
 
Reaching Draupadi who was drowned in sorrow and grief and was devoid of joy, the Pandavas along with Shri Krishna surrounded her from all sides and sat down. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)