श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.16.20 
वैशम्पायन उवाच
प्रदायाथ मणिं द्रौणि: पाण्डवानां महात्मनाम्।
जगाम विमनास्तेषां सर्वेषां पश्यतां वनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं - हे राजन! इसके बाद द्रोणपुत्र अश्वत्थामा महाबली पाण्डवों को मणि देकर उन सबके सामने ही दुःखी मन से वन में चला गया।
 
Vaishmpayana says - O King! After this, giving the gem to the great Pandavas, Drona's son Ashwatthama went to the forest with a sad mind in front of them all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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