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श्लोक 10.16.13-14h  |
वय: प्राप्य परिक्षित् तु वेदव्रतमवाप्य च॥ १३॥
कृपाच्छारद्वताच्छूर: सर्वा स् त्राण्युपपत्स्यते। |
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| अनुवाद |
| दीर्घायु होकर परीक्षित ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करेंगे और वेदों का अध्ययन करेंगे तथा वह वीर बालक शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य से समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त करेगा ॥13 1/2॥ |
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| After attaining a long life, Parikshit will observe the vow of celibacy and study the Vedas and that brave child will acquire the knowledge of all weapons from Kripacharya, son of Sharadvan. 13 1/2॥ |
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