श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 16: श्रीकृष्णसे शाप पाकर अश्वत्थामाका वनको प्रस्थान तथा पाण्डवोंका मणि देकर द्रौपदीको शान्त करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  10.16.13-14h 
वय: प्राप्य परिक्षित् तु वेदव्रतमवाप्य च॥ १३॥
कृपाच्छारद्वताच्छूर: सर्वा स् त्राण्युपपत्स्यते।
 
 
अनुवाद
दीर्घायु होकर परीक्षित ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करेंगे और वेदों का अध्ययन करेंगे तथा वह वीर बालक शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य से समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त करेगा ॥13 1/2॥
 
After attaining a long life, Parikshit will observe the vow of celibacy and study the Vedas and that brave child will acquire the knowledge of all weapons from Kripacharya, son of Sharadvan. 13 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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