व्यास उवाच
एवं कुरु न चान्या तु बुद्धि: कार्या त्वयानघ।
गर्भेषु पाण्डवेयानां विसृज्यैतदुपारम॥ ३४॥
अनुवाद
व्यासजी ने कहा, "अनघ! अच्छा, तुम भी ऐसा ही करो। अब तुम अपने मन में अन्य कोई विचार मत करो। इस अस्त्र को पाण्डवों के गर्भ पर छोड़ दो और शान्त हो जाओ।" 34.
Vyasa said, "Anagha! Well, do the same. Now do not think of anything else in your mind. Release this weapon on the wombs of the Pandavas and calm down." 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥