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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना
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श्लोक 33
श्लोक
10.15.33
एतद स् त्रमतश्चैव गर्भेषु विसृजाम्यहम्।
न च वाक्यं भगवतो न करिष्ये महामुने॥ ३३॥
अनुवाद
हे महामुनि! इसलिए मैं यह अस्त्र पाण्डवों के गर्भ पर छोड़ रहा हूँ। मैं आपकी आज्ञा का कभी उल्लंघन नहीं करूँगा॥33॥
O great sage! Therefore, I am releasing this weapon on the wombs of the Pandavas. I will never disobey your orders. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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