श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.15.29 
यमाबध्य भयं नास्ति शस्त्रव्याधिक्षुधाश्रयम्।
देवेभ्यो दानवेभ्यो वा नागेभ्यो वा कथंचन॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इसे बांधने से शस्त्र, रोग, भूख, देवता, राक्षस या सर्प किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता।
 
By tying it there is no fear of any kind from weapons, diseases, hunger, gods, demons or snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)