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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना
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श्लोक 25
श्लोक
10.15.25
पाण्डवास्त्वं च राष्ट्रं च सदा संरक्ष्यमेव हि।
तस्मात् संहर दिव्यं त्वमस्त्रमेतन्महाभुज॥ २५॥
अनुवाद
महाबाहो! आपको सदैव पाण्डवों, अपनी तथा इस राष्ट्र की रक्षा करनी है; अतः आप अपना यह दिव्यास्त्र लौटा दीजिये।
Mahabaho! You must always protect the Pandavas, yourself and this nation; therefore, return this divine weapon of yours. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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