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mahabharat 10.15.24: इसीलिए महाबली अर्जुन शक्तिशाली होते हुए भी लोक-कल्याण की इच्छा से आपके इस अस्त्र को नष्ट नहीं कर रहा है॥24॥   |   mahabharat अध्याय 10.15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.15.24 
एतदर्थं महाबाहु: शक्तिमानपि पाण्डव:।
न विहन्त्येतदस्त्रं तु प्रजाहितचिकीर्षया॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए महाबली अर्जुन शक्तिशाली होते हुए भी लोक-कल्याण की इच्छा से आपके इस अस्त्र को नष्ट नहीं कर रहा है॥24॥
 
That is why the mighty Arjun, despite being powerful, is not destroying this weapon of yours out of desire for the welfare of the people. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)