श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.15.19 
व्यास उवाच
अस्त्रं ब्रह्मशिरस्तात विद्वान‍् पार्थो धनंजय:।
उत्सृष्टवान्न रोषेण न नाशाय तवाहवे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी ने कहा- तात! कुन्तीपुत्र धनंजय भी इस ब्रह्मास्त्र का ज्ञाता है; परन्तु उन्होंने युद्ध में तुम्हें मारने के लिए क्रोधवश उसे भी नहीं छोड़ा है॥19॥
 
Vyasji said- Tat! Kunti's son Dhananjay is also knowledgeable about this Brahmastra; But they have not spared him in their anger to kill you in battle. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)