व्यास उवाच
अस्त्रं ब्रह्मशिरस्तात विद्वान् पार्थो धनंजय:।
उत्सृष्टवान्न रोषेण न नाशाय तवाहवे॥ १९॥
अनुवाद
व्यासजी ने कहा- तात! कुन्तीपुत्र धनंजय भी इस ब्रह्मास्त्र का ज्ञाता है; परन्तु उन्होंने युद्ध में तुम्हें मारने के लिए क्रोधवश उसे भी नहीं छोड़ा है॥19॥
Vyasji said- Tat! Kunti's son Dhananjay is also knowledgeable about this Brahmastra; But they have not spared him in their anger to kill you in battle. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥