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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना
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श्लोक 14
श्लोक
10.15.14
अधर्मश्च कृतोऽनेन धार्तराष्ट्रं जिघांसता।
मिथ्याचारेण भगवन् भीमसेनेन संयुगे॥ १४॥
अनुवाद
भगवन्! इस भीमसेन ने दुर्योधन को मारने की इच्छा से युद्धस्थल में असत्य का सहारा लेकर महान अपराध किया था॥14॥
'Lord! With the desire to kill Duryodhana, this Bhimasena had committed a great crime by resorting to falsehood in the battlefield. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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