श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 15: वेदव्यासजीकी आज्ञासे अर्जुनके द्वारा अपने अस्त्रका उपसंहार तथा अश्वत्थामाका अपनी मणि देकर पाण्डवोंके गर्भोंपर दिव्यास्त्र छोड़ना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.15.12 
अशक्त: प्रतिसंहारे परमास्त्रस्य संयुगे।
द्रौणिर्दीनमना राजन् द्वैपायनमभाषत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! युद्ध में उस दिव्यास्त्र को नष्ट न कर पाने के कारण द्रोणपुत्र मन में अत्यन्त दुःखी हो गए और व्यासजी से इस प्रकार बोले-॥12॥
 
King! Due to not being able to destroy that divine weapon in the war, Drona's son became very sad in his heart and spoke to Vyasa thus -॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)