श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.14.8 
तथैव द्रोणपुत्रस्य तद स् त्रं तिग्मतेजस:।
प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमण्डलसंवृतम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार द्रोणपुत्र का वह अस्त्र भी, जो अत्यन्त तेजस्वी था, प्रकाश के प्रभामण्डल से घिर गया और बड़ी-बड़ी ज्वालाओं से जलने लगा।
 
Similarly, that weapon of Drona's son, which was extremely radiant, also became surrounded by a halo of light and started burning with huge flames. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)