श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.14.4 
केशवेनैवमुक्तोऽथ पाण्डव: परवीरहा।
अवातरद् रथात् तूर्णं प्रगृह्य सशरं धनु:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण की यह बात सुनकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले पाण्डुपुत्र अर्जुन हाथ में धनुष-बाण लेकर तुरन्त रथ से उतर पड़े॥4॥
 
On hearing this from Lord Krishna, Arjun, the son of Pandu, who killed the enemy warriors, immediately got down from the chariot with bow and arrow in his hand. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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