श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.14.16 
ऋषी ऊचतु:
नानाश स् त्रविद: पूर्वे येऽप्यतीता महारथा:।
नैतदस्त्रं मनुष्येषु तै: प्रयुक्तं कथंचन।
किमिदं साहसं वीरौ कृतवन्तौ महात्ययम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों ऋषियों ने उन दोनों वीरों से कहा - 'वीरों! पूर्वकाल में भी अनेक महारथी नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे, किन्तु उन्होंने कभी मनुष्यों पर उनका प्रयोग नहीं किया। तुम दोनों ने यह महान विनाशकारी दुस्साहस क्यों किया है?॥ 16॥
 
Those two sages said to those two brave men - 'Heroes! In the past too, many great warriors were experts in various types of weapons, but they never used this weapon on humans. Why have you both committed this great destructive audacity?॥ 16॥
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि ऐषीकपर्वणि अर्जुनास्त्रत्यागे चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वके अन्तर्गत ऐषीकपर्वमें अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोगविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)