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mahabharat 10.14.12-13: सब धर्मों के ज्ञाता और समस्त प्राणियों के हितैषी, दो परम तेजस्वी ऋषि अश्वत्थामा और अर्जुन, इन दोनों योद्धाओं के प्रज्वलित अस्त्रों के बीच में उन्हें शान्त करने के लिए खड़े हो गए। 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 10.14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  10.14.12-13 
उभौ शमयितुं वीरौ भारद्वाजधनंजयौ॥ १२॥
तौ मुनी सर्वधर्मज्ञौ सर्वभूतहितैषिणौ।
दीप्तयोरस्त्रयोर्मध्ये स्थितौ परमतेजसौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सब धर्मों के ज्ञाता और समस्त प्राणियों के हितैषी, दो परम तेजस्वी ऋषि अश्वत्थामा और अर्जुन, इन दोनों योद्धाओं के प्रज्वलित अस्त्रों के बीच में उन्हें शान्त करने के लिए खड़े हो गए। 12-13॥
 
The two most brilliant sages, Ashwatthama and Arjun, knowledgeable of all religions and well-wishers of all living beings, stood between the flaming weapons of these two warriors to pacify them. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)