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mahabharat 10.14.11-12h: उन अस्त्रों का तेज सम्पूर्ण लोकों को जलाता हुआ वहीं रह गया। उस समय समस्त प्राणियों के आत्मा नारद और भरतवंशी पितामह व्यास, ये दोनों महर्षि एक साथ वहाँ प्रकट हुए। ॥11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 10.14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 14: अश्वत्थामाके अस्त्रका निवारण करनेके लिये अर्जुनके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग एवं वेदव्यासजी और देवर्षि नारदका प्रकट होना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  10.14.11-12h 
ते त्व स् त्रतेजसी लोकांस्तापयन्ती व्यवस्थिते।
महर्षी सहितौ तत्र दर्शयामासतुस्तदा॥ ११॥
नारद: सर्वभूतात्मा भरतानां पितामह:।
 
 
अनुवाद
उन अस्त्रों का तेज सम्पूर्ण लोकों को जलाता हुआ वहीं रह गया। उस समय समस्त प्राणियों के आत्मा नारद और भरतवंशी पितामह व्यास, ये दोनों महर्षि एक साथ वहाँ प्रकट हुए। ॥11 1/2॥
 
The brilliance of those weapons remained there, burning all the worlds. At that time, the soul of all beings, Narada and the grandfather of the Bharat dynasty, Vyas, both these great sages appeared there together. ॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)