श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 13: श्रीकृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिरका भीमसेनके पीछे जाना, भीमका गंगातटपर पहुँचकर अश्वत्थामाको ललकारना और अश्वत्थामाके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.13.22 
ततस्तस्यामिषीकायां पावक: समजायत।
प्रधक्ष्यन्निव लोकां स् त्रीन् कालान्तकयमोपम:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात उस लकड़ी में काल, अंतक और यमराज के समान भयंकर अग्नि प्रकट हुई। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह अग्नि तीनों लोकों को जलाकर राख कर देगी।
 
Thereafter, a fierce fire like Kaal, Antak and Yamraj appeared in that stick. At that time it seemed that the fire would burn the three worlds to ashes.
 
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि ऐषीकपर्वणि ब्रह्मशिरोऽस्त्रत्यागे त्रयोदशोऽध्याय:॥ १३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वके अन्तर्गत ऐषीकपर्वमें अश्वत्थामाके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोगविषयक तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas