श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 13: श्रीकृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिरका भीमसेनके पीछे जाना, भीमका गंगातटपर पहुँचकर अश्वत्थामाको ललकारना और अश्वत्थामाके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  10.13.17-18 
स दृष्ट्वा भीमधन्वानं प्रगृहीतशरासनम्॥ १७॥
भ्रातरौ पृष्ठतश्चास्य जनार्दनरथे स्थितौ।
व्यथितात्माभवद् द्रौणि: प्राप्तं चेदममन्यत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा ने देखा कि भयंकर धनुर्धर भीमसेन हाथ में धनुष लिए चले आ रहे हैं। उनके पीछे श्रीकृष्ण के रथ पर उनके दो और भाई बैठे हुए हैं। यह सब देखकर द्रोणपुत्र के हृदय में बड़ी पीड़ा हुई। उसी घबराहट में उन्होंने ऐसा करना उचित समझा। 17-18.
 
Ashwatthama saw that the fierce archer Bhimasena was coming with a bow in his hand. Behind him were two more brothers sitting on Shri Krishna's chariot. Seeing all this, Drona's son felt great pain in his heart. In that panic, he thought it appropriate to do this. 17-18.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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