श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 13: श्रीकृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिरका भीमसेनके पीछे जाना, भीमका गंगातटपर पहुँचकर अश्वत्थामाको ललकारना और अश्वत्थामाके द्वारा ब्रह्मास्त्रका प्रयोग  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.13.1 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक् त् वा युधां श्रेष्ठ: सर्वयादवनन्दन:।
सर्वायुधवरोपेतमारुरोह रथोत्तमम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! ऐसा कहकर समस्त यादवकुल को आनन्द प्रदान करने वाले योद्धाओं में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण समस्त उत्तम आयुधों से सुसज्जित उत्तम रथ पर आरूढ़ हुए॥1॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! Saying this, Lord Krishna, the best among warriors who brought joy to the entire Yadav clan, mounted the best chariot equipped with all the best weapons. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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