Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.11.24: यह बात संसार भर में प्रसिद्ध है कि जब वारणावत नगर में कुन्ती के पुत्र बड़े संकट में थे, तब आप ही एक द्वीप की भाँति उनके रक्षक बने थे।   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.11.24 
श्रुतं तत् सर्वलोकेषु परमव्यसने यथा।
द्वीपोऽभूस्त्वं हि पार्थानां नगरे वारणावते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यह बात संसार भर में प्रसिद्ध है कि जब वारणावत नगर में कुन्ती के पुत्र बड़े संकट में थे, तब आप ही एक द्वीप की भाँति उनके रक्षक बने थे।
 
It is known throughout the world that when Kunti's sons were in great trouble in the city of Varanavat, you alone became their protector like an island.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)