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mahabharat 10.11.19: कल्याणी! द्रोणकुमार यहाँ से भागकर दुर्गम वन में चले गए हैं। शोभने! यदि वे युद्ध में मारे भी जाएँ, तो भी तुम कैसे विश्वास करोगी?'   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.11.19 
स कल्याणि वनं दुर्गं दूरं द्रौणिरितो गत:।
तस्य त्वं पातनं संख्ये कथं ज्ञास्यसि शोभने॥ १९॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! द्रोणकुमार यहाँ से भागकर दुर्गम वन में चले गए हैं। शोभने! यदि वे युद्ध में मारे भी जाएँ, तो भी तुम कैसे विश्वास करोगी?'
 
Kalyani! Drona Kumar has run away from here and gone to the inaccessible forest. Sobhne! Even if he is killed in battle, how will you believe it?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)